अक्सर लापरवाही और ग़लत खानपान की वजह से कई लोग अपने दांत वक़्त से पहले गंवा बैठते हैं। इसके बाद उनके पास दो ही विकल्प बचते हैं। या तो नक़ली दांतों का सेट लगाकर खाना खाएं या फिर बिना दांतों के परेशानी में अपना जीवन गुज़ार दें। मगर विज्ञान की तरक़्क़ी और लगातार नई खोजों ने ऐसे लोगों की ज़िंदगी थोड़ी आसान कर दी है। जिन लोगों ने अपने दांत गवां दिए हैं वह डेंटल इम्पलांट के ज़रिए कुछ हद तक अपने नुक़सान की भरपाई कर सकते हैं।

हालांकि असली दांत की जगह कोई नहीं ले सकता। प्रकृति ने हमें जो दांत दिए हैं, मज़बूती में उनकी बराबरी और उनके जितना टिकाउपन किसी कृत्रिम दांत में नहीं लाया जा सकता। मगर दांत क्षतिग्रस्त हो गए हैं या फिर टूट गए हैं तो फिर आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अब या तो नक़ली दांतों का सेट बनवाएं या फिर टूटे दांत की जगह कृत्रिम दांत इम्पलांट करा लें। होती यह भी नक़ली दांत ही है लेकिन इसे टूटे हुए दांत की जगह जबड़े की हड्डी में स्थायी रूप से फिक्स कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को डेंटल इम्पलांट सर्जरी कहते हैं।

क्या यह नक़ली दांत कारगर है? चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि नक़ली दांत बहुत हद तक पुराने दांतों की ताक़त को बनाए रखता है। इसका एक फायदा यह भी होता है कि बाक़ी बचे दांतों को नया जीवन मिल जाता है।

लेकिन क्या यह नक़ली दांत कारगर है? चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि नक़ली दांत बहुत हद तक पुराने दांतों की ताक़त को बनाए रखता है। इसका एक फायदा यह भी होता है कि बाक़ी बचे दांतों को नया जीवन मिल जाता है। डेंटल इम्पलांट होने के बाद तमाम पुरानी दिक़्क़तें बहुत हद तक दूर हो जाती हैं। ख़ासकर अगर आपके दांत टूट गए हैं या फिर आपके दांतों के बीच ख़ालीपन आ गया है तो नक़ली या कृत्रिम दांत आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। सबसे बड़ी बात है कि इसके नक़ली होने का अहसास नहीं होता। एक बार आपने इम्पलांट करा लिया तो यह न सिर्फ प्राकृतिक दांत की तरह ही दिखेगा, बल्कि खाने-पीने में भी दिक़्क़तें नहीं होंगी।

डेंटल इम्पलांट की तकनीक पुरानी है लेकिन हाल के दिनों में इसमें कई बदलाव आए हैं। आजकल नए दांत लगाने में कॉर्टिकल इम्प्लांट्स तकनीक की मदद ली जाती है। इस तकनीक का आधार ऑर्थोपेडिक कॉन्सेप्ट है। आपका डेंटल सर्जन जब इम्प्लांट करता है तो वह हड्डी के कठोर हिस्से पर या जबड़े में एक मेटल स्क्रू का अडाप्टर लगा देता है। इसके बाद इसमें स्क्रू के ज़रिए नए दांत को लगा दिया जाता है। आमतौर पर सामान्य इम्प्लांट के 72 घंटों के भीतर नए दांत अपनी जगह फिक्स हो जाते हैं।

अब सवाल है कि इम्पलांट की क़ीमत क्या है? आमतौर पर एक दांत को रिप्लेस कराने या सामान्य डेंटल इम्पलांट कराने में 20-30 हज़ार रुपये का ख़र्च आता है। इसमें सर्जरी की क़ीमत शामिल है। हालांकि असामान्य हालात में, जबकि ग्राफ्टिंग की भी ज़रुरत पड़ सकती है या फिर मल्टीपल आपरेशन करना पड़ सकता है, तब इसकी क़ीमत थोड़ा बढ़ जाती है। देखने में यह महंगा लगता है लेकिन जिस तरह की सुविधा डेंटल इम्पलांट के बाद है उसके मद्देनज़र यह क़ीमत कुछ भी नहीं है।

बहरहाल, डेंटल इम्पलांट की क़ीमत जगह, मैटीरियल, क्वालिटी और हालात के हिसाब से कम ज़्यादा हो सकती है। डेंटल इम्पलांट के संबंध में और अधिक जानकारी के लिए आप हमारा ब्लॉग पढ़ सकते हैं या फिर मेरा डेंटल क्लीनिक जसोला, नई दिल्ली में हमारे विशेषज्ञों से मुफ्त सलाह ले सकते हैं।

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